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सीमांत में पर्यटन और रोजगार को मिलेगी रफ्तार, आदि कैलाश रन में जुटेंगे 1100 धावक

उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए आदि कैलाश परिक्रमा रन का आयोजन 23 से 26 अक्टूबर तक किया जाएगा। पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में होने वाले इस आयोजन में करीब 1100 धावक हिस्सा लेंगे। गुंजी में 23 अक्टूबर को शाम पांच बजे उद्घाटन समारोह होगा, जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 24 अक्टूबर को मैराथन का शुभारंभ करेंगे। चार दिन तक चलने वाले इस आयोजन में अल्ट्रा मैराथन, मैराथन, हाफ मैराथन, छोटी दौड़ और माउंटेन बाइकिंग प्रतियोगिताएं होंगी।

पर्यटन विभाग ने आदि कैलाश परिक्रमा रन को अपने वार्षिक कार्यक्रम में शामिल किया है। सरकार का उद्देश्य साहसिक खेलों के जरिये सीमांत क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां बढ़ाना और सर्दियों में भी पर्यटकों को पहाड़ों तक आकर्षित करना है। पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश पर आदि कैलाश और नीती घाटी में अल्ट्रा मैराथन को नियमित आयोजन के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे सीमांत गांवों में पर्यटन आधारित रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।
आदि कैलाश मैराथन के प्रति धावकों का आकर्षण बढ़ा है। पिछले वर्ष जहां करीब 750 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था, वहीं इस बार इनकी संख्या बढ़कर लगभग 1100 हो गई है। पर्यटन विभाग ने क्षेत्र में उपलब्ध आवास और अन्य सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पंजीकरण बंद कर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रतिभागियों की संख्या बढ़ाने से पहले उनके ठहरने, भोजन और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है।
आयोजन के तहत 24 अक्टूबर को सुबह छह बजे 70 किलोमीटर की अल्ट्रा मैराथन जौलिंगकोंग से शुरू होगी, जबकि 42 किलोमीटर की मैराथन का फ्लैग ऑफ गुंजी से किया जाएगा। 25 अक्टूबर को सुबह सात बजे 21, 10 और पांच किलोमीटर की दौड़ आयोजित होगी। इसी दिन धावकों को पुरस्कार भी दिए जाएंगे। 26 अक्टूबर को सुबह सात बजे 50 और 25 किलोमीटर की माउंटेन बाइकिंग प्रतियोगिताएं होंगी। इनके विजेताओं को भी पुरस्कृत किया जाएगा।
करीब 4500 मीटर की ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में आयोजित होने वाली इन प्रतियोगिताओं में कम तापमान, विरल हवा और दुर्गम रास्ते प्रतिभागियों के लिए बड़ी चुनौती होंगे। कार्यक्रम के दौरान गुंजी में सांस्कृतिक संध्याएं भी आयोजित की जाएंगी।
सीमांत गांवों में रोजगार बढ़ाने पर जोर
पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार, आयोजन का उद्देश्य केवल खेल गतिविधियों को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि सीमांत गांवों में आर्थिक गतिविधियों को गति देना भी है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से होमस्टे, होटल, गेस्ट हाउस, टैक्सी संचालकों, स्थानीय गाइडों और दुकानदारों को लाभ मिल सकता है। स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सहारा मिलने की उम्मीद है।
उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद और पिथौरागढ़ जिला प्रशासन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में आईटीबीपी और भारतीय सेना का सहयोग भी मिल रहा है। पर्यटन विभाग को उम्मीद है कि इस तरह के आयोजन सीमांत गांवों में रोजगार के विकल्प बढ़ाने के साथ केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में भी मददगार होंगे।

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