’मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर एक्शन मोड में कृषि विभाग, चक्रवात प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत दिलाने की कवायद तेज’….

रायपुर: छत्तीसगढ़ में चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से प्रभावित किसानों को शीघ्र राहत पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर कृषि विभाग ने त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के मार्गदर्शन में विभागीय अमला सक्रिय हो गया है। प्रभावित किसानों की फसलों को हुए नुकसान का वास्तविक आकलन कर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत पात्र किसानों को जल्द से जल्द बीमा दावा राशि दिलाने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देशानुसार किसानों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य शासन ने सभी जिला कलेक्टरों, कृषि विभाग के उप संचालकों तथा संबंधित बीमा कंपनियों को फसल क्षति का सर्वेक्षण निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री परदेशी के मार्गदर्शन में जिला स्तर पर प्राप्त सूचनाओं के आधार पर नुकसान के आकलन और बीमा दावा प्रक्रिया को गति दी जा रही है, ताकि प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहे किसानों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सके।
चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से प्रदेश के विभिन्न जिलों में हुई बारिश और तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी फसलों के साथ ही कटाई के बाद खेतों में सुखाने के लिए रखी गई फसलों को भी नुकसान पहुंचने की सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। कृषि विभाग द्वारा इन सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में सर्वेक्षण की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक फसल क्षति की कुल 59,666 सूचनाएं प्राप्त हुई हैं। इनमें से 88 सूचनाओं का सर्वेक्षण पूर्ण किया जा चुका है, जबकि शेष प्रकरणों में सर्वेक्षण की कार्रवाई जारी है। राज्य शासन ने बीमा कंपनियों को निर्देशित किया है कि किसानों के नुकसान का आकलन करने में अनावश्यक विलंब न हो तथा पात्रता के अनुसार दावा राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत प्रदेश में कुल 11 फसलें अधिसूचित हैं। इनमें धान (सिंचित), धान (असिंचित), मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, अरहर, मूंग, उड़द, कोदो, कुटकी एवं रागी शामिल हैं। योजना के प्रावधानों के अनुसार स्थानीय आपदा के अंतर्गत जलप्लावन से नुकसान होने पर धान (सिंचित एवं असिंचित) को छोड़कर शेष अधिसूचित फसलों के लिए बीमा दावा भुगतान का प्रावधान है।
इसी प्रकार कटाई उपरांत फसल क्षति के अंतर्गत किसानों द्वारा फसल काटकर खेत में सुखाने के लिए रखी गई फसल (करपा) को कटाई के 14 दिनों के भीतर चक्रवात, चक्रवाती वर्षा अथवा बेमौसम बारिश से नुकसान होने की स्थिति में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार बीमा सुरक्षा प्रदान की जाती है।
कृषि विभाग ने प्रभावित किसानों से अपील की है कि वे फसल नुकसान की स्थिति में क्षति होने के 72 घंटे के भीतर कृषि रक्षक पोर्टल के टोल फ्री नंबर 14447 पर सूचना अवश्य दर्ज कराएं। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सूचना प्राप्त होने के 48 घंटे के भीतर संबंधित बीमा कंपनी द्वारा सर्वेयर नियुक्त किया जाएगा। इसके बाद 10 दिनों के भीतर सर्वेक्षण पूर्ण किया जाना है तथा सर्वेक्षण के उपरांत 15 दिनों के भीतर पात्र दावा राशि का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जाएगा।
किसान फसल क्षति और बीमा दावा संबंधी जानकारी एवं सहायता के लिए अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, उप संचालक कृषि अथवा संबंधित बैंक शाखा से भी संपर्क कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों के हितों के संरक्षण और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को समयबद्ध राहत उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग की यह पहल महत्वपूर्ण है। कृषि उत्पादन आयुक्त श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी के मार्गदर्शन में विभागीय अधिकारियों और बीमा कंपनियों के समन्वय से सर्वेक्षण तथा दावा भुगतान की प्रक्रिया को गति दी जा रही है।
राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि फसल क्षति से प्रभावित किसानों को बीमा योजना के प्रावधानों के अनुरूप उनका वाजिब लाभ समय पर प्राप्त हो, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान से उबरने और आगामी कृषि गतिविधियों को जारी रखने में सहायता मिल सके।




