मोदी कैबिनेट के 2 बड़े फैसले, ITLA को मंजूरी और छोटे कारोबार के लिए ₹10,000 करोड़ का फंड

नई दिल्ली
केंद्र सरकार ने ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और छोटे कारोबार को लेकर दो बड़े फैसले किए हैं. केंद्रीय कैबिनेट ने इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी यानी ITLA बनाने को मंजूरी दी है. साथ ही स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज ग्रोथ फंड (SGF) के लिए 10,000 करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दी गई है. सरकार एक तरफ देश में सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई सेवा और दूसरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम को आपस में जोड़कर काम कराने की तैयारी कर रही है. दूसरी तरफ छोटे और मझोले कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का ग्रोथ फंड बनाया जा रहा है. इससे आम आदमी, किसान, छोटे दुकानदार और छोटे कारोबारी को सीधा फायदा होगा।
आपके भी मन में सवाल होगा कि आखिर इस तरह की अथॉरिटी की जरूरत क्यों पड़ी. मान लीजिए किसी किसान ने अपने खेत में गेहूं पैदा किया. गेहूं गांव से मंडी जाएगा, वहां से किसी दूसरे शहर में जाएगा और फिर किसी फैक्ट्री या गोदाम तक पहुंचेगा. इस पूरे सफर में सड़क, ट्रक, रेलवे, गोदाम और कई बार बंदरगाह तक की जरूरत पड़ सकती है. अगर सड़क अच्छी है लेकिन रेलवे कनेक्शन नहीं है, रेलवे है लेकिन माल उतारने-चढ़ाने की व्यवस्था कमजोर है या बंदरगाह तक पहुंचने में बहुत समय लग रहा है तो पूरे सिस्टम का खर्च बढ़ जाता है. यही खर्च आखिरकार सामान की कीमत में भी जुड़ता है. मोदी सरकार की नई ITLA का मकसद इसी पूरी कड़ी को एक साथ देखकर योजना बनाना है।
अभी कैसे होता है?
अभी सड़क, रेलवे, बंदरगाह, हवाई सेवा, जलमार्ग और दूसरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जुड़े काम अलग-अलग मंत्रालयों और एजेंसियों के जरिए होते हैं. ITLA इन सबके बीच बेहतर तालमेल बनाने वाली संस्था के तौर पर काम करेगी. ITLA को आप सरकार का ऐसा सिस्टम समझ सकते हैं, जो यह देखने की कोशिश करेगा कि देश में माल और लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए कौन सा रास्ता सबसे बेहतर है. इसमें सड़क, रेलवे, बंदरगाह, शिपिंग, हवाई सेवा, जलमार्ग, कोस्टल शिपिंग, शहरी परिवहन और लॉजिस्टिक्स सभी को एक साथ देखा जाएगा।
यानी सरकार सिर्फ यह नहीं देखेगी कि सड़क कहां बनानी है. यह भी देखा जाएगा कि उस सड़क का रेलवे, बंदरगाह या दूसरे परिवहन साधनों से कनेक्शन कैसा है. इससे एक ही काम के लिए अलग-अलग विभागों में योजना बनाने की बजाय एक साझा प्लान के हिसाब से काम करने की कोशिश होगी।
10 साल या उससे ज्यादा का ट्रांसपोर्ट मास्टर प्लान बनेगा
ITLA की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक नेशनल ट्रांसपोर्ट मास्टर प्लान तैयार करना होगी. यह छोटी अवधि की योजना नहीं होगी. सरकार ने इसे 10 साल या उससे ज्यादा की अवधि को ध्यान में रखकर बनाने की बात कही है. इसका मतलब यह है कि सरकार आने वाले वर्षों में देश में ट्रांसपोर्ट की जरूरत कहां बढ़ेगी, किस इलाके में सड़क चाहिए, कहां रेलवे कनेक्शन चाहिए, किस बंदरगाह की क्षमता बढ़ानी है और माल की आवाजाही किस तरह आसान बनाई जा सकती है] इन सबको पहले से प्लान करने की कोशिश करेगी. अगर किसी इलाके में अगले 10-15 साल में उद्योग, खेती या कारोबार बढ़ने वाला है तो वहां की सड़क और माल ढुलाई की जरूरत का अंदाजा पहले से लगाया जा सकता है।
500 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट की भी होगी जांच
ITLA की भूमिका सिर्फ प्लान बनाने तक सीमित नहीं होगी. 500 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा लागत वाली केंद्र सरकार की ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की तकनीकी जांच भी ITLA करेगी. इन परियोजनाओं की निगरानी और उनके असर का आकलन भी किया जाएगा. यानी किसी बड़े सड़क, रेलवे या दूसरे ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट पर सैकड़ों-हजारों करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं तो यह देखने की व्यवस्था होगी कि परियोजना तकनीकी रूप से सही है या नहीं और इससे अपेक्षित फायदा मिल रहा है या नहीं. यानी बड़ा प्रोजेक्ट सिर्फ बनाना ही मकसद नहीं होगा, उससे कितना फायदा हुआ, यह भी देखा जाएगा।
FASTag से GSTN तक का डेटा एक जगह आएगा
ITLA का एक और महत्वपूर्ण काम नेशनल ट्रांसपोर्ट डेटा रिपॉजिटरी बनाना होगा. इसमें FASTag, Vahan, GSTN e-way bill, GPS और ट्रैफिक सिस्टम जैसे अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले डेटा को एक साथ लाने की योजना है।
इसका फायदा क्या होगा?
मान लीजिए किसी हाईवे पर हर दिन हजारों ट्रक गुजर रहे हैं. FASTag से टोल और वाहनों की आवाजाही का डेटा मिलता है. GSTN e-way bill से यह पता लगाया जा सकता है कि सामान की आवाजाही किस तरह हो रही है. GPS और ट्रैफिक सिस्टम से यह समझने में मदद मिल सकती है कि ट्रैफिक कहां और कितना है. अगर यह जानकारी एक साथ मिलेगी तो सरकार को यह समझने में आसानी होगी कि कहां सड़क पर दबाव बढ़ रहा है, माल किस रूट से ज्यादा जा रहा है और कहां नई सुविधा की जरूरत है. यानी भविष्य में ट्रांसपोर्ट से जुड़े फैसले ज्यादा डेटा के आधार पर लेने की कोशिश होगी।
इसका फायदा आम आदमी को क्या फायदा
अगर माल एक शहर से दूसरे शहर तक जल्दी और कम खर्च में पहुंचता है तो कारोबारी की लागत घट सकती है. अगर किसान की फसल मंडी तक जल्दी पहुंचती है तो नुकसान कम हो सकता है. अगर फैक्ट्री तक कच्चा माल समय पर पहुंचता है तो उत्पादन बेहतर हो सकता है. और अगर पूरे सिस्टम की लागत कम होती है तो लंबे समय में इसका फायदा कारोबार, किसान और उपभोक्ता, तीनों को मिल सकता है।
10 हजार करोड़ का SGF फंड है क्या?
SGF के लिए 10,000 करोड़ रुपये रखे गए हैं. यह फैसला छोटे और मझोले कारोबार के लिए महत्वपूर्ण है. देश में बहुत से कारोबार ऐसे हैं जो छोटी या मध्यम इकाई से शुरू होते हैं. इनमें मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, सप्लायर, सर्विस कारोबार और दूसरी कारोबारी इकाइयां शामिल हैं. इन कारोबारों को आगे बढ़ने के लिए नई मशीन खरीदने, उत्पादन बढ़ाने, कारोबार का विस्तार करने या नई क्षमता तैयार करने के लिए पूंजी की जरूरत पड़ती है. SGF का उद्देश्य ऐसे छोटे और मझोले उद्यमों की ग्रोथ को सहारा देना है. हालांकि 10 हजार करोड़ रुपये का मतलब यह नहीं है कि हर छोटे दुकानदार या कारोबारी को सीधे उसके खाते में पैसा मिलेगा. यह एक ग्रोथ फंड है. इससे किस तरह के उद्यमों को और किन नियमों के तहत मदद मिलेगी।




